तिथि वार नक्षत्रानुसार देवी पर करें नैवेद्यार्पण शीघ्र प्राप्त होगा फल
अद्यतन कालक्रम आध्यात्मिक सलाहकार : आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ‘वैदिक’
नवरात्रि के प्रथम दिन माता को घी ,पायस, वटक की नैवैद्यार्पण करके निरोगिता एवं पितरों की उद्धार होने की कृपा प्राप्त करें।
नवरात्रि के दूसरे दिन शक्कर दूध गुड़ की जगत जननी को नैवेद्यार्पण करके दीर्घायु ,दुख दूर ,शोक रहित होने की आशीर्वाद प्राप्त करें।
नवरात्रि के तीसरे दिन जगदंबा को दूध, केला ,शहद ,गुड़ के भोग लगाकर दुख दूर, बुद्धिमान, सुंदरता और शोक रहित होने की वरदान प्राप्त करें।
नवरात्रि के चौथे दिन माता को पुआ ,नवनीत, चने से निर्मित, घी का नैवेद्यार्पण करके रोगहीन , विघ्न दूर ,प्रजा संतति होने की कृपा प्राप्त करें।
नवरात्रि के पांचवें दिन केला ,शक्कर ,मधु ,और दूध जगत जननी को अर्पण करके बुद्धिमान, दीर्घायु ,सुंदरता ,दुख दूर होने के आशीर्वाद प्राप्त करें।
नवरात्रि के छठे दिन देवी को शहद, मिसरी ,घी में भूना ओल, और दही जगदंबा को भोग लगाकर सुंदरता ,चर्म रोग दूर ,देवी प्रिय होने का आशीर्वाद प्राप्त करें।
नवरात्रि के सातवें दिन मधु , गोधृत ,गुड़ ,तक्र जगत जननी को अर्पण करके सुंदरता ,रोगहीन , शोक- रहित ,विघ्न दूर होने की कृपा प्राप्त करें।
नवरात्रि के आठवें दिन माता को नारियल ,पायस , गुड़,पुआ के नैवेद्यार्पण करके संताप दूर ,पितरों का उद्धार, शोक रहित, विघ्न दूर होने का आशीर्वाद प्राप्त करें।
नवरात्रि के नौवे दिन लाजा ,दूध ,दाख,मक्खन जगदंबा को अर्पण करके लोग परलोक सुख ,दुख ,दूर होने की कृपा प्राप्त करें।
नवरात्रि के अंतिम दिन( तिथि वृद्धि के कारण) तिल निर्मित,केला ,खजूर कर्कटी जगत जननी को अर्पण करके यम भय दूर ,बुद्धिमान होने की कृपा प्राप्त करें।
आश्विन मास में देवी दुर्गा को दूध का नैवेद्य प्रिय है।
नोट 👉🏻 – जो भी आप माता को निवेदित करते हैं उसे आचार्य गुरु को आधा अर्पण करें तदोप्रान्तंं आधा स्वयं ग्रहण करके पूर्ण फल प्राप्त करें ऐसा शास्त्रीय विधान है।


