श्री बज्रांग आश्रम में वैदिक परम्परा के अनुसार सम्पन्न हुआ श्रावणी उपाकर्म
संवादसूत्र : देवली, प्रतापपुर, प्रयागराज
सनातन वैदिक परम्परा के पावन पर्व श्रावणी उपाकर्म के पुण्य अवसर पर श्री बजरंग आश्रम, देवली प्रतापपुर, प्रयागराज में वैदिक रीति से श्रावणी उपाकर्म का दिव्य अनुष्ठान सम्पन्न हुआ।
गुरुकुल संचालक आचार्य धीरज याज्ञिक जी महाराज के पावन सान्निध्य में आश्रम के बटुक ब्रह्मचारियों ने शास्त्रीय विधि से दशविध स्नान, हेमाद्रि संकल्प, नवीन यज्ञोपवीत धारण, जीर्ण यज्ञोपवीत विसर्जन, देव-ऋषि-पितृ तर्पण, अग्नि उपस्थान एवं वेदारम्भ की क्रियाएँ सम्पन्न कीं।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने विद्यार्थियों को उपाकर्म के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा – “उपाकर्म केवल जनेऊ बदलने की क्रिया नहीं, अपितु ज्ञान के प्रति पुनः संकल्प है। श्रावण पूर्णिमा के दिन ऋषियों ने वेदाध्ययन का पुनरारम्भ किया था, इसलिए इसे ऋषि पर्व भी कहा जाता है। यज्ञोपवीत हमारे आत्म-संयम, वेदाध्ययन और ब्रह्मचर्य व्रत का प्रतीक है।”
आश्रम प्रांगण में ब्रह्मचारी वटुकों द्वारा सामूहिक रूप से
- ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत् सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
मंत्र के साथ नवीन यज्ञोपवीत धारण किया गया तथा १००८ गायत्री महामंत्र का जप किया गया। प्रकृति की गोद में, वट-वृक्षों के मध्य बैठकर किये गये इस अनुष्ठान ने वैदिक गुरुकुल परम्परा को साकार कर दिया।
अंत में सभी ने राष्ट्र-कल्याण, विश्व-मंगल तथा सनातन धर्म की रक्षा हेतु प्रार्थना की। कार्यक्रम में आश्रम के समस्त बटुक, आचार्यगण एवं स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।


